रस्में
पूरे सप्ताह की हर रस्म का छोटा-सा परिचय, उसी क्रम में जिसमें वे होंगी, ताकि आप जान सकें कि क्या हो रहा है और उसका महत्व क्या है।
- गणेश पूजन
- विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा, जिससे हर शुभ काम की शुरुआत होती है।
- मातृ पूजन
- मातृ देवियों और अपने पूर्वजों की पूजा, उनके आशीर्वाद की कामना के साथ।
- धान धरेती
- घर में धान रखना, इस प्रार्थना के साथ कि घर हमेशा भरा-पूरा रहे।
- तेल
- घर की सुहागिनों के हाथों तेल और हल्दी का पहला स्पर्श।
- मंडप
- बाँस के खंभों पर बना पवित्र छत्र, जिसके नीचे रस्में होती हैं।
- बरिच्छा
- शगुन और आशीर्वाद के साथ वधू पक्ष का वर को अपनाना।
- गोद भराई
- परिवार में स्वागत के लिए दुल्हन की गोद फल, मिठाई और उपहारों से भरना।
- सगाई
- अँगूठियों का लेन-देन, यानी रिश्ते की पक्की मोहर।
- पहनावन
- सुबह-सुबह दूल्हे को सजाने-सँवारने की रस्म।
- माय मधरा
- ननिहाल पक्ष का मान-सम्मान, जब वे उपहार लेकर आते हैं।
- हल्दी
- निखार, रक्षा और सौभाग्य के लिए वर-वधू को हल्दी का लेप।
- मेहंदी
- दुल्हन के हाथों-पैरों पर, और मेहमानों के हाथों पर रची मेहंदी।
- संगीत
- गीत और नाच की शाम, जब दोनों परिवार एक-दूसरे के लिए प्रस्तुति देते हैं।
- तिलक
- वधू पक्ष का वर के माथे पर कुमकुम का तिलक लगाना, अपनाने और सम्मान का प्रतीक।
- सेहरा
- बारात से पहले दूल्हे के मुख पर बाँधा जाने वाला फूलों या मोतियों का सेहरा।
- बारात
- सजी हुई घोड़ी पर दूल्हे की बारात, गाजे-बाजे और नाच के साथ।
- द्वार पूजा
- द्वार पर वधू पक्ष का आरती और मालाओं से दूल्हे का स्वागत।
- जयमाला
- वर-वधू का एक-दूसरे को वरमाला पहनाना, विवाह की पहली रस्म।
- कन्यादान
- माता-पिता का अपनी बेटी का हाथ सौंपना, मंडप का सबसे पवित्र क्षण।
- फेरे
- पवित्र अग्नि के सात फेरे, हर फेरे के साथ एक वचन।
- सिंदूर दान
- दुल्हन की माँग में सिंदूर भरना, सुहाग की निशानी।
- विदाई
- दुल्हन की अपने परिवार से विदाई, धन्यवाद के रूप में कंधे के ऊपर से फेंके चावलों के साथ।